माउंट आबू में अखिल भारतीय न्यायविद सम्मेलन

आध्यात्मिकता सभी समस्याओं का समाधान है : न्यायमूर्ति ईश्वरैया
 

ज्ञान सरोवर ( आबू पर्वत ),२४ जून २०१७ । आज ज्ञान सरोवर स्थित हार्मनी हॉल में ब्रह्माकुमारीज एवं आर ई आर एफ की भगिनी संस्था ,न्यायविद प्रभाग के संयुक्त तत्वावधान में एक अखिल भारतीय सम्मेलन का आयोजन हुआ। सम्मलेन का मुख्य विषय था -“आध्यात्मिकता द्वारा सुख और शांति की प्राप्ति” . इस सम्मलेन में बड़ी संख्या में प्रतिनिधिओं ने भाग लिया . दीप प्रज्वलित करके इस सम्मेलन का उद्घाटन सम्पन्न हुआ.

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राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी ईश्वरैया ने आज के सम्मेलन की अध्यक्षता की और कहा की राजयोग के अभ्यास से मेरी निर्णय शक्ति में काफी वृद्धि हो गयी और मैं लाखों मसलों का फैसला कम समय में ही कर पाया।
हर वयक्ति एक स्पिरिट है , ऑलमाइटी की संतान है। लोग आज यह सब कुछ भूल गया है। किसी को मालूम नहीं की वो कहाँ से आया है और कहाँ जाना है। मरने के बाद हर कोई अपना संस्कार ही साथ लेकर जाता है। अतः संस्कारों को उत्तम बनाने के लिए राजयोग का अभ्यास करना होगा। उसके लिए आध्यात्मिकता को अपनाना ही पड़ेगा। यह ज्ञान , खुदा -खुद आकर यह ज्ञान दे रहा है। यह सभी के लिए हैं। इसी ज्ञान से ही समाज और बदलेगा। १९९९ को मैं गॉड से मिला और उनकी बातों को समझा। आज जीवन में हर प्रकार की सुख शांति की अनुभूति कर रहा हूँ।
ज्ञान सरोवर अकादमी की निदेशक राजयोगिनी निर्मला दीदी -“राजयोग के द्वारा सुख शांति तो मिलती ही है मगर उसके अलावा अनेक शक्तियां प्राप्त होती है। निर्णय शक्ति आदि बढ़ जाती है. समझ बढ़ जाती है और सही गलत का फैसला आसानी से कर पाते हैं। आज स्वास्थ्य की भी काफी समस्या है। राजयोग से स्वास्थय भी उत्तम बना रहता है। योगी जीवन शैली से खान पान शुद्ध होता है – सब सुधर जाता है। ईश्वरीय याद के द्वारा हम शरीर से अलग जा कर तकलीफ को दूर कर लेते हैं। तनाव नहीं ठहर पाता है जीवन में। राजयोग के अभ्यास से लोग चिंता मुक्त हो जाते हैं और समस्याओं का समाधान मिल जाता है। धन संपत्ति की समस्या को आसानी से राजयोगी सुलझा लेते हैं। राजयोग हमें साधारणता सिखाता है और सीमित धन में भी कमी कमजोरी मह्सूस नहीं होती है। राजयोग के अनेक लाभ हैं। इसको जीवन में अवश्य अपनाया जाना चाहिए।”

सम्मेलन के मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति ए रामा लिंगेश्वर राव , तेलंगाना उच्च न्यायालय , ने आज अपने वक्तव्य में कहा कि मैंने अनेक संस्थान देखे हैं दुनिया में मगर ब्रह्मा कुमारीस न्यायवद प्रभाग अनूठा है। यह वैश्विक है , हर जाति धर्म और लिंग से ऊपर। मानवता को शांति और प्रसन्नता चाहिए , न्यायविदों को भी चाहिए। मगर प्रश्न है की यह मिले कैसे ?

आत्मा के सच्चे गुणों को प्रदर्शित करना होगा। आध्यात्मिक जागरण समाज में स्थापित करना होगा। सभी को मालूम है की ईश्वर एक है मगर सभी अलग अलग तरीके से उसको प्राप्त करने में लगे हुए हैं। धर्म हमें जुदा करता है जबकि आध्यात्म हमें एक सूत्र में बांधता है। अतः आध्यात्मिक पुरुषार्थ के द्वारा हम जीवन में सच्ची शांति और प्रसन्नता प्राप्त कर सकेंगे। संस्थान काफी उत्तम काम कर रहा है। कोशिश यह होनी चाहिए की हम लगातार आध्यात्मिक बन कर चलें।

के एस पी सी ए बेंगलुरु के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए एस पाश्चापुरे ने विशिष्ट अतिथि के बतौर अपनी बातें रखीं। कहा कि इस संस्थान से जुड़ने के बाद मुझे ईश्वर की प्रेरणा मिली की मुझे जनता की भलाई के लिए कार्य करना चाहिए। मैंने इस संस्थान से सीखा की मुझे क्रोध और अन्य विकारों पर नियंत्रण रखना चाहिए। यहां की शिक्षाओं ने मुझे आत्म बोध करवाया।
आज सभी को आध्यात्मिकता की जरूरत है।  न्यायविदों और अधिवक्ताओं को और अधिक जरूरत  है।  क्योंकि उनके हाथ में काफी शक्ति है।  अतः न्यायविदों को मन में शांति और प्रेम की भावना रख कर फैसला करना होगा तभी मानवता का कल्याण होगा।
आपने बताया की न्यायमूर्तिओं को परिपक्व होना चाहिए।  परिपक्वता से ही सही फैसले लिए जा सकेंगे।  परिपक्वता आती है अनासक्त वृत्ति से और अनासक्त वृत्ति आध्यात्म से प्राप्त की जा सकती है।
पी जे ढ़ोलकीआ  पूर्व सचिव , विधि आयोग ,गुजरात सरकार।  ब्रह्मा कुमारीस संस्थान को खूब खूब धन्यवाद दे रहा हूँ।  इस संस्थान ने हर वर्ग के समाज को आध्यात्मिकता का परिचय दिया है।  आध्यात्मिकता का काफी प्रचार प्रसार किया है संसार में।  इस सस्थान की कृपा से ही मैं अपने जीवन में आध्यात्मिकता को लागू कर पाया।  मेरे अंदर इन शिक्षाओं के कारण सकारत्मकता आ गयी।  आज ७७ वर्ष की उम्र में भी मैं सक्रिय रूप से सेवाएं दे रहा हूँ और ख़ुशी ख़ुशी दे र अहा हूँ।  आध्यात्मिकता के कारण मुझे कभी भी जॉब डिस सटिस्फैक्शन नहीं हुआ।  हर प्रकार की सकारत्मकता मेरे अंदर आद्यात्मिक्ता से भरी हुई है।  इसको जरूर से जरूर अपनाया जाना चाहिए।
 
राजयोगी बी एल माहेश्वरी , ब्रह्मा कुमारीस न्यायविद प्रभाग के राष्ट्रीय समन्वयक ने कहा कि जीवन में शांति और प्रसन्नता की मार्ग की बड़ी रुकावट है हमारी नकारात्मकता।  हमारी अ-मानवीयता। अमानुषिकता का कारण है आध्यात्म से अनभिग्यता। आध्यात्म से ही जीवन में मूल्यों का संचार होगा। अतः हम सभी को आत्मा को ठीक से समझ कर परमात्मा से अपना संपर्क बना कर चलना चाहिए।
जब तक हम आत्मा को समझ नहीं लेंगे – जीवन में शांति और प्रसन्नता नहीं आ पायेगी। आध्यात्मिकता ही वह एकमात्र नियम है – जिसको जीवन में धारण करके पूरी दुनिया शांति और प्रसन्नता प्राप्त कर सकती है। समायोजन एक बड़ा मूल्य है जो जीवन को महान बना देता है।
ब्रह्मा कुमारीस न्यायविद प्रभाग की राष्ट्रीय संयोजक तथा स्वर्णपदक प्राप्त रश्मि ओझा , डीन,डिपार्टमेंट ऑफ़ लॉ ,बॉम्बे यूनिवर्सिटी ने आज के सुअवसर पर अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा की हमारे अंदर ही शांति और प्रसन्नता है मगर हम उसको खोज नहीं पाते। हमें यह जानना होगा की किस प्रकार से हम अपने जीवन में शांति और प्रसन्नता प्राप्त कर सकेंगे। यहां ब्रह्मा कुमारीस में हमें बताया जाएगा कि आध्यात्मिकता इस लक्ष्य को पाने में हमारी मदद करती है।
 
अधिवक्ता बी के अमर सिंह भरतपुर , ने इस सम्मेलन का लक्ष्य बताया। आपने कहा कि दिव्यता का अंश हम सभी के अंदर ही है और हम सभी को प्रयत्न करके उस दिव्यता को खोज निकालना होगा। आध्यात्मिकता ही उस दिव्यता का मूल है। आध्यात्मिकता अर्थात मैं आत्मा हूँ – इस बात की अनुभूति करना। ऐसी अनुभूति से दिव्यता जन्म लेने लगती है। इस सम्मेलन का लक्ष्य है अपने स्वरुप से , आत्मिक स्वरुप से जुड़ जाना।
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